ये राग मल्हार क्यूँ कहलाया
मल का हार (नाश) करे ऐसे समझाया
खंड चार प्रकार दस
और भी मल्हार है लेकिन इतने बस
(lesser known prakars : Charju ki Malhar, Pat Malhar, Bilawal Malhar, Chhaya Malhar)
सूरदासी, मेघ और धूलिया मल्हार
वो है खंड एक में बिना गांधार
सूरदासी, मेघ तो सब समझे
धूलिया में मियाँ मल्हार सारंग अंग से
(खंड दो) प्रकरोमें मियाँ मल्हार है प्रथम अब
गाँवे सिर्फ कोमल गांधार लोक सब
गौड और नट मल्हार है खंड तीन में
लगता है सिर्फ शुद्ध गांधार जिसमे
बने प्रकार जयंत, नट और देश
करो मिश्रण मल्हारसे वो ही संदेश
जोडो शुद्ध गांधार मियाँ मल्हार में
बने रामदासी प्रकार सहज में
मीरा मल्हार है निराला
कान्हरा मल्हार के साथ लगे आला
सभी का है मिश्रण मियाँ मल्हार से
ये दस है मल्हार संगीत संसार में
We have considered 10 prakars of Bhairav divided into 2 Khands
Khand 1 – have 3 ragas which are ‘standalone’ ragas – Bhairav, Ahir Bhairav, Biaragi Bhairav
Khand 2 – content 7 prakars which are not as commonly sung / played. These are constructed by altering notes into main Bhairav raga – Bangal Bhairav, Mangal Bhairav, Zilaf Bhairav, Shivmat Bahirav, Nand Bhairav, Nat Bhairav, Maand Bhairav