आदि राग भैरव – संधिप्रकाश स्वरुप
भाव धीर गंभीर, मन भावे खूब
प्रकार अनेक, दस जिसमे है प्रचल
तीन है बहुत प्रचार में, सीधा है जिनकाचलन
भैरव, अहीर भैरव और बैरागी भैरव
ये सबके लिए है आसान
ज़ाहिर है कविता में दिया है सम्मान
(भैरव में)
करो नी वर्जित, बने बंगाल भैरव
करो ग वर्जित, बने मंगल भैरव
करो रे वर्जित, बने ज़िलफ भैरव
जोड़ो कोमल रे और शुद्ध ध, बने शिवमतभैरव
ये चारों में चलन सीधा, स्वरुप से बनेगौरव
जोड़ो नंद भैरव में, बने नंद भैरव
जोड़ो नट भैरव में, बने नट भैरव
जोड़ो राग माड़ भैरव में, बने माड़ भैरव
ये तीन है भैरव के प्रकार,
करो इनका सत्कार
मेल राग में है भैरव की जमीन
इतर रागोंका मेल से राग बने रंगीन
Main source of Kanhara prakars is Darbari Kanhra, the rest are offshoots / variations of the same, which are Adana Kanhra, Abhogi Kanhra, Suha Kanhar, Sughrai Kanhra, Naiki Kanhra, Sankirna prakars, Bageshree Kanhra, Kafi Kanhra, Kaunsi Kanhra, Gunji Kanhra, Basanti Kanhra