नायकी भी है अड़ाना, सुहा, सुघराई के जूथ में
फर्क है आरोही-अवरोही में चलन का प्रयुक्त में
जब बागेश्री, काफी, मालकौंस, मालगुंजी और बसंत
जोड़ो दरबारी में, तो बने सकीर्ण रंग
ये पांच प्रकार इसतरहा से आये समझ सबके संग
और भी है प्रकार कान्हरा के, जो बने है अपनी अपनी समझ से
कहना मेरा इसलिये है सबको, के बहार रखो इनको अपनी ज़ेहन से
(गुंजी कान्हरा, हुस्सैनी कान्हरा, मुद्रिकी कान्हरा, बसंती कान्हरा, लाचारी कान्हरा, लंकेश्री कान्हरा)
Main source of Bilawal prakars is Shuddha Bilawal, Variations – Sarparda Bilawal, Jaijaiwanti Bilawal, Hamir Bilawal, Yamani Bilawal, Gaud Bilawal, Jaijai Bilawal, Devgiri Bilawal, Shukla Bilawal