होता है गाना बजाना दरबार-ऐ-सुलतान जभी तो कान्हरा बना दरबार की शान उसकी खुशबू और संगीनता से बना मनहरा और दुनिया में कहलाया दरबारी कान्हरा क्योंकी दरबारी में गांधार और धैवत होता है काफी आंदोलित परिणाम से तानोंका सरजाना बनता है विपरीत (अड़ाना कान्हरा) तब तो बना वेगवान राग अड़ाना, जिसका है पेशकश बहुत सुरचित… Continue reading Poem5 कान्हरा